Sunday, October 6, 2013

Meguro International Haiku Circle-मेगुरो अंतर्राष्ट्रीय हाइकु सर्कल


Meguro International Haiku Circle held its first international haiku meeting on February 18, 1995 as MIFA International Haiku Circle. It was hosted by Meguro International Friendship Association (MIFA) as an activity designed to enhance inter-cultural understanding between Japanese and foreigners staying in Japan. The circle, steered by MIFA and a volunteer group (which included the haiku meeting proponents) staged four haiku meetings at the MIFA office in each of the first three years. However, from the fourth year, the volunteer group organized between three and five additional haiku meetings. Since the group started accepting haiku submissions through the Internet, it has been enjoying haiku sent from more than twenty countries around the globe. In July 1999, a haiku book was published to commemorate the 5th anniversary of MIFA International Haiku Circle. Now, to commemorate the 10th anniversary, we have compiled the present volume, which consists of the works composed in the haiku meetings from July 1999 to June 2004, along with a selection of essays penned by our members. Taking this opportunity, the group has decided to change its name. Henceforth, we shall call ourselves "Meguro International Haiku Circle." Long may the joy of haiku continue to bring together in friendship the people of the world!
Yasuomi Koganei

मेगुरो अंतर्राष्ट्रीय हाइकु सर्कल ने अपनी सर्वप्रथम हाइकु गोष्ठी फरवरी १८, १९९५ में की। इसके मेगुरो अंतर्राष्ट्रीय फ्रेंडशिप असोसिएशन (मी अ फ आ) एक ऐसी संस्था जिस से जापान में रह रहे प्रवासी लोग जापानी संस्कृति से परिचित हो जायें और इनमें और जापान में आदान प्रदान आरम्भ हो जाय। (मी अ फ आ) और एक ग्रुप ने पहले पहल तीन से पाँच गोष्टियों का आयोजन किया जब से इस ने जालघर द्वारा प्रस्तुतियाँ लेनी आरम्भ की तब से विश्व को २० से अधिक देशों के कवि हाइकु का आनन्द ले रहे हैं। जुलाई १९९९ में एक हाइकु की पुस्तक प्रकाशित की गई थी। मेगुरो अंतर्राष्ट्रीय हाइकु सरकल के पाँचवें वार्षिकोत्सव अवसर पर। उसके पश्चात् २००४ में दसवीं जयंती के अवसर पर एक और द्वीभाषीय संकलन प्रकाशित हुआ और इस समय इस संस्था का एक नया नाम रखा गया। आप भी इस में आमंत्रित हैं और हर महीने अपने हाइकु अंग्रेजी में लिखकर आप इसे भेज सकते हैं।
इस के हाइकु जालघर पर उपलब्ध कराने का उदेश्य यह था कि इस ग्रुप के जापानी सदस्य जो अंग्रेजी में हाइकु लिख रहे हैं। हर महीने यह मेगुरो के कुमिन सिटिजेन सेंटर में मिलते हैं और एक एक करके उनके हाइकु काष्टफलक पर लिखे जाते हैं। हर एक हाइकु पर टिप्पणी होती है और इस से प्रत्येक हाइकु को रिवाईज़ किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय कवियों के हाइकु भी पढ़े जाते हैं और मीटिंग के पश्चात् इस मीटिंग के बारे में श्री यसुमई कोगनाई जालघर द्वारा सब को बता देते हैं।

तोकुतोमी कौन थे

तोकुतोमी कौन थे और यूकी तेइकी हाइकु सोसायटी क्या है ?
कियोशी तोकुतोमी और कियाको शिबाता तोकुतोमी दो लोग थे जो द्वितीय महा युद्ध के पश्चात् जापान में मिले और प्रेम करने लगे एक अमरीकी थे और एक जापानी। वह अमेरिका आये, विवाह किया और सेन होंस के लिफोरनिया में अपना नया जीवन आरम्भ किया। १९६७ में तपेदिक के पश्चात् कियोशी को दवाईयों के कारण बहरापन हो गया। जब उन्हें इलाज करने पर भी पता लगा कि अब इसका कोई उपाय नहीं तो कियोको की सलाह पर उन्होंने हाइकु को अपनाया। कियोको के लिये यह वही विषय था जिसे उन्होंने कालेज में पढ़ा था परन्तु कियोशी के लिये यह एक नया अनुभव था। वह हाइकु से इतने आकर्षित हो गये कि उन्होंने सोचा कि वह दोनों एक अंग्रेजी भाषी लोगों का हाइकु समुह बनाया जाये। १९७५ में यूकी तेइकी हाइकु समुदाय बना जिसका उदेश्य था कि हाइकु को पारंपरिक तौर से ५-७-५ क्रमों में और ऋतु संकेतिक शब्द प्रयोग करना सिखाया जाये। हालांकि यहाँ पारंपरिक तरीका सिखाया जाता है फिर भी उन लेखकों के काम को भी जो हाइकु शोध नई दिशाओं में कर रहे हैं। दर वर्ष वह ६ बार एक अध्ययन का जनरल 'गेप्पो` प्रकाशित करते हैं और सदस्यों के हाइकु का संकलन वर्ष में एक बार। हर वर्ष वह उत्तर केलिफारनिया के तट पर एक हाइकु रिटरीट आयोजित करते हैं जहाँ कवि प्रकृति में रम जायें और अपनी लिखाई पर ध्यान देते हुए औरों से अपना काम आदान प्रदान करें।

Submission Guidelines- प्रस्तुतिकरण के निर्देश


All texts must be bilingual, i.e. English and Hindi. Please send up to ten haiku, in the body of your email and in an attached Word document if possible. While we prefer work which has not been published before, however, if it is of high quality we will consider previously published items. Please provide [details of publication].
We are happy to consider you citation of the published worth essays dealing with haiku translation. We welcome for reviews of your recent bilingual publications and also work in haiku related genres. Please send English print publications to : Dr. (Mrs.) Angelee Deodhar and Hindi print publication to : Dr. Jagdish Vyom
Submissions are read on a continuous basis. Once accepted, we will normally publish your work within 6 months. Send all submissions of haiku with your short biography, and the name of the translator.
We look forward to hearing from you !

भेजने के समय ई-मेल के अंदर या वर्ड फाईल में यूनीकोड में ही भेजें। यह प्रयत्न करें कि पहले छपी रचनाएँ न भेजें। हमारा यह प्रयत्न सभी नई रचनाओं को प्रकाशित करने का होगा परन्तु यदि कोई रचना अति प्रभावशाली होगी तो हम उसे भी देख लेंगे। पहले प्रकाशित रचनाएँ कहाँ छपी थीं उसका विवरण अवश्य भेजें। यदि आपके पास भाषान्तर से जुड़ा हुआ कोई लेख है तो उसे भी अवश्य भेजें। समीक्षार्थ द्विभाषीय पुस्तकें कृपया डॉ. अंजलि देवधर को भेजें और हिन्दी की पुस्तकें डॉ. जगदीश व्योम को भेजें। अपना परिचय संक्षेप में अवश्य भेजें।
वर्ष भर आपकी प्रस्तुतियाँ पढ़ी जाएंगी और आपको इनकी स्वीकृति के बारे में सूचित किया जाएगा। कृपया यह ध्यान रखें कि संपादकों का निश्चय अंतिम निश्चय होगा और वाद-विवाद नहीं किया जाएगा। हमारा यह प्रयास रहेगा कि आपकी रचनाएँ ६ महीने के अंदर प्रकाशित की जाएँ।
हमें आपकी रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

Welcome to Haiku Sansaar


Haiku Sansaar is a new online bilingual journal, presenting haiku and its related genres. In this, our inaugural issue, we present the work of both international and Indian poets who are well-known among their own language groups but unknown outside it.
The journal’s chief goal is to foster understanding and communication among haiku poets and readers who speak different languages so that we can learn from each other. It is our hope that Haiku Sansaar will help to promote friendship in a truly international way.
We would like to take this opportunity to thank Mr. Denis Garrison for his hard work and also those fellow-poets and friends who have contributed to this issue.
Editors : Dr. Jagdish Vyom (Hindi)
Dr. Angelee Deodhar (English)

हाइकु संसार में आपका स्वागत है। जालघर पर हाइकु संसार हाइकु का एक नवीन जरनल है जिस में हाइकु और हाइकु सम्बंधित विधाऐं प्रकाशित होंगी। वैसे तो जालघर पर कई जरनल ऐसे हैं जिन में हाइकु के बारे में कुछ न कुछ तो मिल ही जाता है परन्तु इस जरनल में एक अन्तर यह है कि यह द्वीभाषीय हैं और इस में यही प्रयत्न रहेगा कि सब प्रस्तुतियाँ द्विभाषीय (अंग्रेज़ी-हिन्दी) ही हों।
इस उद्घाटनात्मक अंक में आप अन्तर्राष्ट्रीय व भारतीय कवियों की हाइकु रचनाऐं पढ़ पायेंगे। इसके अतिरिक्त आपको अगले अंकों में हाइबुन व रेन्कु और पुस्तक समीक्षाऐं पढ़ने को मिलेंगी। साथ साथ आप को एक नई उपलब्धि यह भी मिलेगी कि इस में बच्चों के लिये एक विशेष भाग होगा जहाँ बच्चे न केवल हाइकु पढ़ पायेंगे परन्तु उनके साथ चित्र डाऊनलोड कर के चित्रों में रंग भी भर पायेंगे। आशा है हाइकु संसार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हाइकु मैत्री का प्रतीक बन जाएगा।
इस समय हम श्री डेनिस गेरिसन का आभार प्रदर्शन करते हैं और उन अन्य कवियों का भी जिन्होंने अपनी रचनाऐं इस अंक में प्रकाशित करने की अनुमति दी है।
संपादक : डॉ. जगदीश व्योम (हिंदी)
डॉ. अंजलि देवधर (अंग्रेजी)

Saturday, October 5, 2013